BG 5.18 meaning

भगवद गीता ५.१८ (BG 5.18): क्या मूक पशुओं में भी वही आत्मा है जो हममें है?

BG 5.18 meaning

Q1. भगवद गीता के अनुसार समदृष्टि (Equal Vision) क्या है?

Ans: भगवद गीता (BG 5.18) के अनुसार, समदृष्टि का अर्थ है सभी जीवित प्राणियों (इंसान, पशु, पक्षी) के बाहरी शरीर और सामाजिक स्थिति के भेद को भूलकर, उन सभी के भीतर एक ही परमात्मा के अंश यानी आत्मा को देखना।

Q2. क्या जानवरों में भी इंसानों जैसी ही आत्मा होती है?

Ans: हाँ, सनातन दर्शन के अनुसार आत्मा अविभाज्य और शाश्वत है। जीवों के बीच का अंतर उनके आंतरिक गुणों, उनके शरीर के आकार (Body Shape) और उनके मस्तिष्क की क्षमता (Brain Capacity) के कारण होता है, लेकिन आत्मा का मूल तत्व सबमें समान होता है।

Q3. पशु योनि को ‘भोग योनि’ क्यों कहा जाता है?

Ans: पशु योनि में जीवों के पास विवेक और आध्यात्मिक कर्म करने की स्वतंत्रता नहीं होती। वे केवल अपने पिछले जन्मों के कर्मों के फल को भोगते हैं। नया कर्म करने का अधिकार केवल मनुष्य योनि (कर्म योनि) में ही होता है।

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