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Introduction
Transfer of Flat and Membership: को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (CHS) में ट्रांसफर ऑफ फ्लैट एंड मेंबरशिप केवल एक वित्तीय लेनदेन नहीं है, बल्कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है। जब आप किसी हाउसिंग सोसाइटी में एक फ्लैट खरीदते हैं, उपहार में पाते हैं, या वारिस के रूप में प्राप्त करते हैं, तो फ्लैट के भौतिक मालिकाना हक के साथ-साथ सोसाइटी की शेयर पूंजी (Share Capital) और सदस्यता का ट्रांसफर होना भी उतना ही अनिवार्य होता है।
महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज (MCS) अधिनियम, 1960 और सोसाइटी के आदर्श उपनियमों (Model Bye-laws) के तहत इस पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट नियम और समय-सीमा निर्धारित की गई है। आइए इस कानूनी प्रक्रिया को विस्तार से और आसान चरणों में समझते हैं।
फ्लैट और सदस्यता ट्रांसफर के विभिन्न प्रकार
Transfer of Flat and Membership मुख्य रूप से तीन स्थितियों में होता है:
- ओपन मार्केट सेल (Open Market Sale): जब एक मौजूदा फ्लैट मालिक अपनी मर्जी से किसी बाहरी खरीदार को बाजार मूल्य पर अपना फ्लैट बेचता है।
- गिफ्ट डीड या इनहेरिटेंस (Gift or Inheritance): जब कोई मालिक अपने किसी करीबी रिश्तेदार को फ्लैट उपहार में देता है या किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस/नॉमिनी को फ्लैट ट्रांसफर किया जाता है।
- कोर्ट ऑर्डर या डिक्री (Court Order): किसी पारिवारिक विवाद, डाइवर्सिटी या अन्य कानूनी मामलों में अदालत के आदेश के तहत होने वाला ट्रांसफर।
आवश्यक दस्तावेज (Mandatory Documentation)
Transfer of Flat and Membership की प्रक्रिया को वैध बनाने के लिए प्रबंध समिति (Managing Committee) के पास निम्नलिखित दस्तावेजों का सेट जमा करना अनिवार्य है:
- मूल शेयर सर्टिफिकेट (Original Share Certificate): जिसके पीछे ट्रांसफर की प्रविष्टि (Endorsement) की जाएगी।
- पंजीकृत दस्तावेज (Registered Agreement): पंजीकृत सेल डीड (Sale Deed), गिफ्ट डीड (Gift Deed) या रिलीज डीड की अटेस्टेड कॉपी, जिस पर उचित स्टांप ड्यूटी चुकाई गई हो।
- अनुसूची के फॉर्म (Bye-law Forms):
- फॉर्म नंबर 20(1): फ्लैट और शेयर ट्रांसफर करने के लिए मौजूदा सदस्य द्वारा दिया जाने वाला नोटिस।
- फॉर्म नंबर 20(2): नए खरीदार/आवेदक द्वारा सदस्यता के लिए दिया जाने वाला आवेदन पत्र।
- फॉर्म नंबर 21: मौजूदा सदस्य और नए खरीदार दोनों द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त आवेदन (Joint Application)।
- अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate – NOC): यदि संपत्ति पर कोई मौजूदा होम लोन है, तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान से मिलने वाली एनओसी।
- पहचान और पते का प्रमाण: नए सदस्य का पैन कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज तस्वीरें।
हाउसिंग सोसाइटी प्रबंध समिति की भूमिका और प्रक्रिया
ट्रांसफर ऑफ फ्लैट एंड मेंबरशिप: एक बार जब आवश्यक फॉर्म और दस्तावेज सोसाइटी कार्यालय में जमा कर दिए जाते हैं, तो प्रबंध समिति को कानून के दायरे में रहकर निम्नलिखित प्रक्रिया पूरी करनी होती है:
1. दस्तावेजों की जांच और नो-ड्यूज (No-Dues Verification)
Transfer of Flat and Membership: समिति सबसे पहले यह जांच करती है कि क्या मौजूदा फ्लैट मालिक पर सोसाइटी का कोई पुराना मेंटेनेंस शुल्क या जुर्माना बकाया है। ट्रांसफर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सोसाइटी से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) जारी होना अनिवार्य है।
2. ट्रांसफर प्रीमियम और अन्य वैध शुल्क
- ट्रांसफर प्रीमियम (Transfer Premium): महाराष्ट्र सरकार के नियमों और बाय-लॉज के अनुसार, ओपन मार्केट सेल के मामलों में सोसाइटी अधिकतम ₹25,000/- तक ही ट्रांसफर प्रीमियम ले सकती है। इससे अधिक की मांग करना गैर-कानूनी है।
- नोट: यदि ट्रांसफर परिवार के सदस्यों के बीच (जैसे माता-पिता से बच्चों को) या नॉमिनी को हो रहा है, तो कोई ट्रांसफर प्रीमियम लागू नहीं होता है।
- प्रवेश शुल्क (Entrance Fee): नए सदस्य को सदस्यता के लिए एक मामूली प्रवेश शुल्क (आमतौर पर ₹100 से ₹500 के बीच) देना होता है।
3. प्रबंध समिति की बैठक में मंजूरी (Committee Approval)
Transfer of Flat and Membership: दस्तावेज मिलने के बाद आयोजित होने वाली अगली प्रबंध समिति की बैठक (Managing Committee Meeting) में इस आवेदन को एजेंडे में रखा जाता है। समिति द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद ही नए खरीदार को सोसाइटी का ‘सक्रिय सदस्य’ (Active Member) माना जाता है।
4. शेयर सर्टिफिकेट और आई-फॉर्म में प्रविष्टि

Transfer of Flat and Membership: मंजूरी मिलने के बाद, सचिव (Secretary) और अध्यक्ष (Chairman) मूल शेयर सर्टिफिकेट के पीछे नए सदस्य का नाम दर्ज कर अपने हस्ताक्षर और सोसाइटी की सील लगाते हैं। साथ ही, सोसाइटी के ‘आई’ और ‘जे’ रजिस्टरों (I & J Registers) में नए सदस्य का नाम अपडेट किया जाता है।
महत्वपूर्ण समय-सीमा और वैधानिक अधिकार (Timeline)
- 3 महीने का नियम: को-ऑपरेटिव नियमों के अनुसार, सभी वैध दस्तावेज और शुल्क प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने (90 दिन) के भीतर प्रबंध समिति को सदस्यता ट्रांसफर पर अपना अंतिम निर्णय लेना आवश्यक है।
- डीम्ड मेंबरशिप (Deemed Membership): यदि सोसाइटी 90 दिनों के भीतर आवेदन को न तो स्वीकार करती है और न ही कोई लिखित अस्वीकृति (Rejection) भेजती है, तो नियमों के तहत आवेदक को ‘डीम्ड मेंबर’ (माना गया सदस्य) घोषित करने के लिए उप-पंजीयक (Deputy Registrar) के पास अपील करने का अधिकार मिल जाता है।
निष्कर्ष
Transfer of Flat and Membership: की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए पारदर्शिता और कानूनी नियमों का कड़ाई से पालन करना दोनों पक्षों (सोसाइटी और खरीदार) के लिए फायदेमंद होता है। सही समय पर सभी फॉर्म जमा करने और सरकारी उपनियमों (Bye-laws) का ध्यान रखने से भविष्य में आने वाले किसी भी प्रकार के मालिकाना हक के विवादों से बचा जा सकता है।
Ram Niwas Bansal
“Dedicated and highly qualified professional with a specialized focus on Cooperative Housing Society (CHS) Management and Legal Advocacy. Leveraging a strong technical background and an Indian Air Force veteran’s discipline, I provide end-to-end solutions for housing societies in Mumbai.
With a Government Diploma in Cooperation and Accountancy (GDCA) and a Diploma in Naturopathy, I bridge the gap between administrative excellence and holistic community well-being.
Disclaimer (अस्वीकरण)
Transfer of Flat and Membership: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। सहकारी आवास सोसायटियों से जुड़े नियम, उपनियम (Bye-laws) और सरकारी सर्कुलर अलग-अलग राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात आदि) में भिन्न हो सकते हैं और इनमें समय-समय पर संशोधन भी होते रहते हैं। यह लेख किसी भी प्रकार की आधिकारिक कानूनी या व्यावसायिक सलाह का विकल्प नहीं है। अपने विशिष्ट मामले में किसी भी प्रकार का कदम उठाने या फॉर्म जमा करने से पहले, कृपया अपनी सोसाइटी के अधिकृत उपनियमों की जांच करें या किसी योग्य सहकारी कानून विशेषज्ञ (Co-operative Legal Consultant) या उप-पंजीयक (Registrar) कार्यालय से परामर्श लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: क्या हाउसिंग सोसाइटी नए फ्लैट खरीदार से ₹25,000 से अधिक का ट्रांसफर प्रीमियम वसूल सकती है?
उत्तर: नहीं। महाराष्ट्र सहकारी संस्थाएं अधिनियम और मॉडल उपनियमों के तहत, ओपन मार्केट में फ्लैट ट्रांसफर के मामले में कोई भी सोसाइटी अधिकतम ₹25,000/- से अधिक का ट्रांसफर प्रीमियम नहीं मांग सकती। यदि कोई सोसाइटी इसे “डोनेशन” या किसी अन्य नाम से जबरन वसूलने का प्रयास करती है, तो सदस्य इसके खिलाफ को-ऑपरेटिव कोर्ट या डिप्टी रजिस्ट्रार के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
Q2: यदि फ्लैट किसी परिवार के सदस्य को उपहार (Gift Deed) में दिया जा रहा है, तो क्या तब भी ट्रांसफर प्रीमियम देना होगा?
उत्तर: नहीं। यदि फ्लैट का ट्रांसफर किसी सदस्य के मृत्योपरांत उसके वैध नॉमिनी (Nominee) को किया जा रहा है, या परिवार के प्रथम रक्त संबंधों (First Blood Relations) जैसे पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन को गिफ्ट डीड के माध्यम से ट्रांसफर किया जा रहा है, तो नियमों के अनुसार सोसाइटी कोई भी ट्रांसफर प्रीमियम नहीं वसूल सकती।
Q3: क्या बिना शेयर सर्टिफिकेट ट्रांसफर कराए भी मैं फ्लैट का कानूनी मालिक बना रह सकता हूँ?
उत्तर: फ्लैट की रजिस्ट्री (Registered Agreement) होने से आप उस भौतिक संपत्ति के मालिक तो बन जाते हैं, लेकिन जब तक सोसाइटी के रिकॉर्ड और शेयर सर्टिफिकेट में आपका नाम दर्ज नहीं होता, तब तक आपको सोसाइटी के मामलों में वोट देने, चुनाव लड़ने या सोसाइटी की बैठकों में हिस्सा लेने का कानूनी अधिकार (Membership Rights) प्राप्त नहीं होता। इसलिए रजिस्ट्री के तुरंत बाद सदस्यता ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है।
Q4: यदि प्रबंध समिति जानबूझकर मेरा सदस्यता आवेदन लटका रही है, तो मेरे पास क्या कानूनी उपाय है?
उत्तर: यदि आपके सभी दस्तावेज सही हैं और पूर्ण आवेदन जमा करने के 90 दिनों के भीतर सोसाइटी कोई जवाब नहीं देती है, तो आप संबंधित क्षेत्र के डिप्टी रजिस्ट्रार (Deputy Registrar of Co-operative Societies) के पास ‘डीम्ड मेंबरशिप’ (Deemed Membership) के लिए धारा 22(2) के तहत आवेदन दायर कर सकते हैं। रजिस्ट्रार दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सीधे सदस्यता ट्रांसफर करने का आदेश जारी कर सकते हैं।
