company health insurance vs personal policy

Corporate Health Insurance: एक सुरक्षित कवच या एक खतरनाक धोखा?

Q1. क्या मैं अपनी कंपनी की पॉलिसी को नौकरी छोड़ने के बाद पर्सनल पॉलिसी में बदल (Port) सकता हूँ?

Ans: हाँ, IRDAI के नियमों के अनुसार आप कॉर्पोरेट ग्रुप कवर को व्यक्तिगत पॉलिसी में बदल सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको नौकरी छोड़ने से कम से कम 45 दिन पहले इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करना होगा, और अंतिम निर्णय आपकी सेहत और कंपनी के नियमों (Underwriting) पर निर्भर करता है।

Q2. यदि मेरे पास कंपनी का ₹5 लाख का कवर है, तो मुझे कितने का सुपर टॉप-अप लेना चाहिए?

Ans: आपको कम से कम ₹5 लाख के डिडक्टिबल (Deductible) के साथ ₹20 से ₹50 लाख का Super Top-Up प्लान लेना चाहिए। इससे आपका प्रीमियम बहुत कम रहेगा और कुल सुरक्षा बढ़कर ₹25-50 लाख हो जाएगी।

Q3. क्या कंपनी की पॉलिसी का वेटिंग पीरियड मेरी पर्सनल पॉलिसी में गिना जाएगा?

Ans: यदि आप नौकरी के दौरान ही एक अलग पर्सनल पॉलिसी लेते हैं, तो उसका वेटिंग पीरियड स्वतंत्र रूप से कटना शुरू होता है। लेकिन अगर आप कॉर्पोरेट पॉलिसी को सीधे पर्सनल में पोर्ट कराते हैं, तो पुराने क्रेडिट का लाभ मिलने की कुछ शर्तें होती हैं, पर प्रीमियम काफी बढ़ सकता है।

Q4. क्या नियोक्ता (Employer) द्वारा दिए गए हेल्थ इंश्योरेंस पर टैक्स छूट मिलती है?

Ans: नहीं, जिस प्रीमियम का भुगतान आपकी कंपनी करती है, उस पर आपको Section 80D के तहत कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता। टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए आपके पास स्वयं के बैंक खाते से भुगतान की गई पर्सनल पॉलिसी होनी चाहिए।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *