Ram Niwas Bansal

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 14 Shlok and Meaning in Hindi by Ram Niwas Bansal

बदलते समय में मानसिक स्थिरता कैसे पाएं: भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 14 से सीख

भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 14 से सीख : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर भावनाओं के उतार-चढ़ाव से जूझते रहते हैं। कभी सफलता की खुशी तो कभी ………

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A reflective image contrasting stale, processed food symbols (canned goods, microwave, leftovers) with fresh, vibrant fruits and grains, illustrating Bhagavad Gita Chapter 17 Verse 10 regarding Tamasic diet, featuring embedded Sanskrit and English text.

भोजन का गहरा विज्ञान: भगवद गीता अध्याय 17 श्लोक 10 का गहन विश्लेषण

परिचय आज के आधुनिक युग में, हम कैलोरी, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर ध्यान केंद्रित करने वाली पोषण संबंधी सलाह से

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श्रीमद्भगवद गीता श्लोक 17.9 के अनुसार राजसी भोजन के जलन और अशांति वाले प्रभाव का आध्यात्मिक चित्रण।

श्रीमद्भगवद गीता श्लोक 17.9 : राजसी भोजन के 3 भयंकर नुकसान (Must Read)

मद्भगवद गीता श्लोक 17.9 के अनुसार राजसी भोजन के जलन और अशांति वाले प्रभाव का आध्यात्मिक चित्रण। आज के दौर में हम अपनी डाइट को लेकर बहुत सजग हैं—कितनी कैलोरी है, कितना प्रोटीन है? लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि……..

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“Healthy Satvik Aahaar food with fruits, dal, roti, salad, nuts, and milk – natural vegetarian Indian diet in a peaceful setting.”

🌿 सात्त्विक आहार: स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का रहस्य

आज के समय में fast food, processed food और oily food हमारी lifestyle का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन यह श्लोक हमें चेतावनी देता है।

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