fasting therapy for diabetes

Fasting Therapy for Diabetes: 3 तरीके जिससे टाइप 2 के मुख्य कारण ठीक हो सकते हैं

क्या फास्टिंग से मेरा ब्लड शुगर बहुत ज्यादा गिर सकता है?

अगर आप अपनी डायबिटीज को केवल डाइट से मैनेज कर रहे हैं, तो शॉर्ट या मॉडरेट फास्टिंग के दौरान सही मायने में हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर 70 mg/dL से नीचे जाना) होने का खतरा बहुत कम होता है, क्योंकि लिवर ‘ग्लूकोनोजेनेसिस’ प्रक्रिया के जरिए खुद ग्लूकोज बना लेता है। लेकिन, अगर आप इंसुलिन या सल्फोनिलुरिया जैसी दवाएं ले रहे हैं, तो दवाओं की खुराक कम किए बिना फास्टिंग करना खतरनाक हाइपोग्लाइसीमिया का कारण बनेगा। ऐसे में डॉक्टर से दवा एडजस्ट कराना अनिवार्य है।

फास्टिंग के दौरान “डॉन फेनोमेनन” (Dawn Phenomenon) क्या है?

कई डायबिटीज मरीजों को लगता है कि फास्टिंग के बावजूद सुबह के समय उनका ब्लड शुगर बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर आपको जगाने के लिए कोर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन जैसे काउंटर-रेगुलेटरी हार्मोन रिलीज करता है। ये हार्मोन लिवर को ट्रिगर करते हैं कि वह स्टोर ग्लूकोज को बाहर निकाले। कुछ हफ्तों की लगातार फास्टिंग से जैसे-जैसे आपकी इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरेगी, सुबह का यह स्पाइक अपने आप कम होने लगता है।

डायबिटीज के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग बेहतर है या प्रोलॉन्ग्ड (लम्बी) फास्टिंग?

लंबे समय की सफलता के लिए, इंटरमिटेंट फास्टिंग (जैसे 16:8 या 20:4 प्रोटोकॉल) आम तौर पर बेहतर है क्योंकि इसे आप अपनी स्थायी जीवनशैली का हिस्सा बना सकते हैं। प्रोलॉन्ग्ड फास्टिंग (24 घंटे से अधिक) अंगों की चर्बी को तेजी से साफ जरूर करती है, लेकिन इसमें इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, मांसपेशियों का नुकसान और दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बहुत ज्यादा होता है, जिसके लिए सीधे डॉक्टर की देखरेख की जरूरत होती है।

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